टिम हेनमैन ब्रीटेन के सफलतम टेनिस खिलाड़ियों में से एक हैं और वे 1996 में और 1999 से 2005 तक नंबर 1 ब्रिटिश खिलाड़ी रहे हैं। टेनिस में लंबी वंशावली वाले परिवार के तीन लड़कों में से सबसे कम उम्र के लड़के के रूप में, उन्होंने तीन साल की उम्र से पहले से खेलना शुरू किया; उनके दादा, दादी और परदादी सभी ने द चैम्पियनशिप, विंबलडन खेली है। हेनमैन की अपनी बारी जल्द ही आ गई। 1994 में विंबलडन में पहले दौर में हारने के बाद, उन्होंने अगले वर्ष उसी स्थान पर ग्रैंड स्लैम प्रतियोगिता में अपना पहला मैच जीता; इसके बाद वे वहाँ पर चार सेमीफाइनल तक पहुंचे। हालांकि, जब पहली बार उन्होंने विंबलडन में कोर्ट देखे थे तो वो बहुत पहले की बात थी, एक ऐसा दिन जिसे वे और उनकी माँ कभी नहीं भूलेंगे। संयोग से यही वो दिन भी है जब उन्होंने रोलेक्स के बारे में जाना था।

मुझे 1981 के उस दिन के बारे में सब कुछ याद है जब मैं विंबलडन में पहली बार आया था। संभवतः, मैं आपको यह भी बता सकता हूँ कि उस दिन मैंने क्या पहना था। यह उस प्रतियोगिता का शुरुआती सोमवार था, मैं छह साल का था और मैं और मेरी माँ सौभाग्यशाली थे कि हमें सेंटर कोर्ट की दो टिकट मिल गई थी। जब बियोन बौर्ग कोर्ट पर उतरे, वे पाँच बार के डिफेंडिंग चैम्पियन थे, इसने मुझ पर बहुत बड़ा प्रभाव डाला। मेरे खयाल से सबसे बड़ा प्रभाव इसलिए था, क्योंकि वो जीत रहे थे! और जब आप बच्चे होते हो, तो जीतने वाले व्यक्ति का समर्थक बनना कहीं अधिक मज़ेदार होता है, इसलिए, निश्चित रूप से वे मेरे पहले टैनिस आइडल थे। यही वो समय था जब मैंने अपने करियर का पहला और एकमात्र निर्णय लिया था। मैं विंबलडन में खेलने के सपने देख रहा था।

मैं एक टेनिस परिवार से आता हूँ, मेरी माँ एक जूनियर खिलाड़ी थी, मेरे दादा- दादी ने विंबलडन में एक साथ मिश्रित युगल खेला और यहाँ तक की मेरी परदादी ने भी 1900 की शुरुआत में यहाँ पर खेला था। वास्तव में, मेरी परदादी, ओवरआर्म सर्व करने वाली पहली महिला थीं और मेरी दादी विंबलडन में अंडरआर्म सर्व करने वाली अंतिम महिला थीं।

मैं निश्चित रूप से नहीं कह सकता कि मेरे माता-पिता को विश्वास था कि मैं एक बहुत अच्छा खिलाड़ी बन सकता था, लेकिन वो मुझे एक मौका देना चाहते थे क्योंकि वो देख सकते थे कि यह मेरे लिए कितना मायने रखता था।

परिवार मैं सबसे छोटा, सबसे कमजोर और सबसे धीमा होने के कारण, मुझे प्रतिस्पर्धा और मुक़ाबला करना सीखना पड़ा। मैं निश्चित रूप से नहीं कह सकता कि मेरे माता-पिता को विश्वास था कि मैं एक बहुत अच्छा खिलाड़ी बन सकता था, लेकिन वो मुझे एक मौका देना चाहते थे क्योंकि वो देख सकते थे कि यह मेरे लिए कितना मायने रखता था, कैसे इस खेल के प्रति मेरी चाहत और प्रेम प्रत्यक्ष था। मेरे परिवार का वातावरण निश्चित रूप से एक व्यक्ति के रूप में मेरे विकसित होने का अहम कारक है।

जब मुझे अंततः विंबलडन में खेलने का मौका मिला, तो मैं बहुत उत्साहित था। मैं वहाँ जा कर खेलने का इंतज़ार नहीं कर सकता था, मैं आनंद लेना चाहता था, और मैंने इसकी बहुत अच्छी तैयारी की थी। हर बार जब मैं कोर्ट पर उतरता था, मेरे दिमाग में सपने देखते हुए एक छह वर्ष के बच्चे की तस्वीर आती थी।

1981 का वही दिन था जब मैंने सेंटर कोर्ट पर लगी रोलेक्स घड़ियाँ देखी थी, और मैंने अपनी माँ से पूछा था कि रोलेक्स का क्या अर्थ होता है। तभी वह दिन था जब मैंने पहली बार सोचा था और आशा की थी कि, एक दिन मैं अपने स्वयं के लिए भी एक रोलेक्स खरीद सकता हूँ। फटाफट 32 साल बाद जब तक मैंने अपनी पहली रोलेक्स नहीं पाई थी, जो यह घड़ी है, यह मेरे लिए बहुत मायने रखती है, लेकिन यह निश्चित रूप से इस इंतज़ार के लायक थी।

1981 का वही दिन था जब मैंने सेंटर कोर्ट पर लगी रोलेक्स घड़ियाँ देखी थी, और मैंने अपनी माँ से पूछा था कि रोलेक्स का क्या अर्थ होता है।

आज जब मैं इस घड़ी की ओर देखता हूँ तो मेरा दिमाग एकदम से स्टैंड में खड़े उस छह वर्षीय लड़के की भूमिका में वापस चला जाता हैं। मेरी माँ के पास उस दिन की तस्वीरें हैं और शायद अभी तक हमारे पास घर पर तब के टिकट भी रखे हुए हैं, इसलिए जब मुझसे मेरी घड़ी के पीछे की कहानी पूछी गई थी, तो मैंने इस निवेदन को अपनी माँ को भेज दिया था और कहा: “तुम्हें याद है?” और उन्होंने जवाब में वापिस लिखा, “मुझे वो ऐसे याद है जैसे कल ही की बात हो”।

टिम हेनमन की घड़ी

ऑयस्टर परपेचुअल मिलगॉस

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